पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

286 ... बापू – यादों में नहीं सिर्फ जेबों में रह गए हैं

सभी साथियों को मेरा नमस्कार कुछ दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ ज़िंदगी की भागमभाग से कुछ समय बचाकर आज आप सभी के समक्ष उपस्थित हूँ पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!
गुरुवार का दिन है तो अब पेश है ................. मेरी पसंद के कुछ लिंक :))


बापू – यादों में नहीं सिर्फ जेबों में रह गए हैं
बापू
अच्छा ही हुआ
जो आप नहीं हैं आज
अगर होते तो
रो रहे होते खून के आंसू
गणतंत्र को गनतंत्र बना देने वाले
क्या रत्ती भर भी समझ पाये हैं !
मेरी धरोहर ब्लॉग पर ............यशोदा अग्रवाल :)

गज़ल के शेर बनाना हमें नहीं आता
ये माना साथ निभाना हमें नहीं आता
किसी को छोड़ के जाना हमें नहीं आता

वो जिसकी जेब में खंजर ज़ुबान पर मिश्री
उसी से हाथ मिलाना हमें नहीं आता

स्वप्न मेरे ब्लॉग पर ................ दिगंबर नासवा :)


हाँ मैं जिन्दगी हूँ ,                                
तुम्हे जीना सीखा दूंगी.....
घुल गयी जो..
तुम्हारी सांसो में तो....यक़ीनन..
तुम्हारी सांसो को महका दूंगी !
'आहुति' ब्लॉग पर .................... सुषमा वर्मा :)

'आइटम' कहते हुए लज्जा तो आनी चाहिए !
कोख में ही क़त्ल होने से बची कलियाँ हैं हम  ,
खिल गयी हैं इस जगत में झेलकर ज़ुल्मो सितम ,
मांगती अधिकार  स्त्री भीख नहीं चाहिए ,
अपने हिस्से की हमें भी अब इमरती चाहिए !

भारतीय नारी ब्लॉग पर .........शिखा कौशिक 'नूतन':)

खिड़की के चार सींखचों और
दरवाज़े के दो पल्ले के पीछे
इस बेतरतीब बिस्तर
और इन तकियों के रुई के फाहे में,
बिना रुके इस घुमते पंखे
और इस सफ़ेद CFL की रौशनी में,
हर उस शय में
जो मुझे इस कमरे के
चारो तरफ से झांकती है...
खामोश दिल की सुगबुगाहट ब्लॉग पर ...........शेखर सुमन :)


इसी के साथ ही आप सब मुझे इजाजत दीजिए अलविदा शुभकामनाएं फिर मिलेंगे अगले हफ्ते इसी दिन

-- संजय भास्कर

3 टिप्‍पणियां:

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