पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

209..इसी से सारी चहल-पहल है

सादर अभिवादन स्वीकारें
भाई संजय आज नही हैं
बीमा कम्पनी में विक्रय अधिकारी हैं वे
उनको जनवरी से मार्च तक विश्राम
नहीं मिलता

आकी प्रस्तुति में...

"मन पाए विश्राम जहां में".....अनीता
पात झरे भई शाख गुलाबी
आड़ू के वृक्ष इतराते,
सूनी डालें सहजन की सज
आसमान से करती बातें !


बदलती शक्लों 
बदलते जिस्मों में 
चलता-फिरता ये इक शरारा 
जो इस घड़ी 
नाम है तुम्हारा 
इसी से सारी चहल-पहल है 

तनिक विलंब जो हुई है हमसे, 
मुख मंडल यूँ क्षीण प्रिये क्यों, 
अति लघु सी एक बात पे तेरे, 
नैन यूँ तेज विहीन प्रिये क्यों ?

"पूर्वाभास में 25 हाइकू".....संतोष कुमार सिंह
आया बसंत
बिहँस उठे भृंग
सुनायें छंद।

"कविता मंच में"..... साधना वैद
रसोई से बैठक तक,
घर से स्कूल तक,
रामायण से अखबार तक
मैने कितनी आलोचनाओं का ज़हर पिया है
तुम क्या जानो !

बस आज यहीं तक
आज्ञा देँ
यशोदा







7 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात.पाँच लिंकों के आनंद के आज के संकलन के लिए बधाई..सुंदर सूत्र..आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात....
    सुंदर संकलन।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर संकलन है आज का भी, हमेशा की तरह ।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिअ आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर संकलन है आज का भी, हमेशा की तरह ।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिअ आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति..
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज की हलचल में कविता मंच के सौजन्य से अपनी रचना को देख सुखद अनुभूति हुई ! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी !

    उत्तर देंहटाएं

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