पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

'संवाद-रंग'




सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

कल ही तो शुरुआत हुई है
2015 को विदा करने की तैयारी 
और 
2016 को स्वागत करने के लिए
 तैयार हो रहने की होशियारी

आगत विगत स्वागत
 बन जायें तथागत

काश सम्भव होता
काश में न अटक आगे बढ़ते हैं 
और 
अपनी सोच से अवगत कराते हुये
आज एक ब्लॉग के 
कुछ  लिंक से 
परिचय कराते हैं 


तू मेरी प्रतिछाया है
सबसे बड़ा आभास है
मेरे हर जीत का कारण
और हर हार में
बढ़ाता विश्वास है।



 तो आप किसी एक गुट के नहीं हैं?
वैसे हमारी पत्रिका भी किसी गुट, किसी ग्रुप को महत्त्व नहीं देती।
हम जितने हैं, एक टीम की तरह काम करते हैं।
वैसे अच्छा लगा कि आप 
दूसरे गुट की पत्रिका की भी तारीफ करते हैं।



बदलाव की इस उत्सव से भारत के रंग और चटक होते गए।
इसके हर विकास में सबका योगदान रहा।
भारत की समन्वयात्मक संस्कृति में पंडितों का योगदान रहा।
 साधु-संन्यासियों का योगदान रहा। 
ख्वाजाओं ने भी इस संस्कृति को सँवारा।



लड़कों के हाफ-पैंट से भी छोटा उसका कैज़ुअल-ड्रेस है।
कॉलेज से निकलते ही शाम तक दोस्तों के साथ पार्क-मॉल
और न जाने कहाँ-कहाँ घूमना, कभी-कभी बिअर का 
एक-दो पैग ले लेना तो अब उसकी जीवन-शैली हो गई है। 
अब वह नंदी के नाम से पुकारी जाती है।



अगर सोचते हो
लक्ष्य को पाना है
तो हर हाल में
आगे
और आगे
और आगे
बढ़ते जाना है।




देखो जला रही जग को है,
संघर्षों की अद्भुत ज्वाला।
प्रतिपल कँपा रहा सबको है?
भीमकाय बन संशय काला।
ज्वालाओं को सुधा-सिक्त कर





नव-गति, नव-लय, ताल-छनद नव,
नवल-कंठ, नव जलद-मंद्र-रव,
नव-नभ के नव-विहग-वृंद को
नव पर नव स्वर दे।
    नवीनता चाहे किसी भी अवसर का हो, 
मन में उल्लास भरने वाले उस नव पल के लिए 
मेरा मन भी असीम शुभकामना व्यक्त कर रहा


फिर  मिलेंगे  ....... तब  तक  के  लिए  

आखरी  सलाम  

विभा  रानी  श्रीवास्तव








7 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय दीदी
    सादर नमन
    संवाद
    मधुरतम
    सबके मन को भाता है
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय दीदी
    सादर नमन!
    मेरा अहोभाग्य कि आपकी पारखी दृष्टि पड़ी। मन विह्वल है। अज्ञेय से उधार लेकर कहता हूँ - 'जो कली खिलेगी जहाँ, खिली, जो फूल जहाँ है, जो भी सुख जिस भी डाली पर हुआ पल्लवित, पुलकित, मैं उसे वहीं पर अक्षत, अनाघ्रात,अस्पृष्ट, अनाविल ------' आपको हृदय से अर्पित करता हूँ।
    वास्तव में यह मेरे लिए 'इस साल का तौहफा' है।
    हृदय से आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर सूत्र चयन सुंदर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...