पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 27 दिसंबर 2015

162...कितनी बड़ी भूल है हमारी....

जय मां हाटेशवरी...

कल २६ दिसम्बर था... यानी...
अमर शहीद ऊधम सिंह जी की ११६ वीं जयंती
s320/shaheedUdhamSingh
भारत माँ के इस सच्चे सपूत को हमारा शत शत नमन |
कल के ही दिन...यानी २6 दिसम्बर १७६१को गुरु गोविन्द सिँह जी के दो बेटे बाबा फतेह सिँह
और बाबा जोरावर सिँह
को जिँदा दीवार मेँ चुनवा दिया गया था  इन दो वीर सपूतोँ ने अपने प्राणोँ की परवाह न करते हुए अपने देश और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान
दिया सिर्फ इसलिए कि उन्होने अपने धर्म का परित्याग करके इस्लाम कबूल नहीँ किया था
पर कल तो गुजर गया...हमने इन महान सपूतों को याद तक नहीं किया...
कितनी बड़ी भूल है हमारी....
हम इन ऐतिहासिक दिनों को भूलकर... नव वर्ष की तैयारी में लगे हैं...
जिस दिन शायद ऐसा कुछ भी  नहीं हुआ था...
अब चलते हैं आज की हलचल की ओर...
कौन गुस्ताख़ छेड़ता है हमें
मेरे गीत
परSatish Saxena
नदी, मांदों में खोजता है हमें !
नासमझ आशिकी पे लानत है
इतनी शिद्दत से चाहता है हमें !
देख लें दुनियां बिना वीसा के
मोदियापा भी, हंसाता है हमें


अजन्मा अहसास
गुज़ारिश
परसरिता भाटिया
पाकर तुम्हे इतना करीब
महसूसती हूँ
तुम्हारा अहसास
तुम्हारा स्पर्श
तुम्हारी साँसे
तुम्हारी धड़कन
पा लेती हूँ



 
क़ानून
कविताएँ
परOnkar
जिसे क़ानून की ज़रूरत
सबसे ज़्यादा होती है,
बस वही नहीं जानता
कि क़ानून क्या होता है,
उसे लागू कौन करता है,
कैसे करता है,
कि उसकी व्याख्या भी होती है.
क़ानून अँधा नहीं होता,
दरअसल जिसे क़ानून की
सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है,
वह अँधा होता है.

 
मामूल मिजाजी .......
Amrita Tanmay
परAmrita Tanmay
इसकदर मेरे चलने में ही
कसम से ये कायनात थरथराती है
निखालिस ख़्वाब या हकीकत में
मुझसे इलाहीयात भी शर्माती है
जबान की ज्यादती नहीं ये , असल में
जवानी है , जनून है, जंग परस्ती है


लम्बी सड़क सा जीवन
Akanksha
परAsha Saxena
एक खिचाव सा होता
अजीब लगाव सा होता |
फिर से पहुँच जाती
 कल्पना जगत में
खो जाती सुरम्य वादी की
 उन रंगीनियों में |
कभी लम्बी कभी छोटी
 छाया वृक्षों की 
देती संकेत
 विविधता पूर्ण  जीवन की

आज की प्रस्तुति  के लिये पांच लिंक तो पूरे हुए...
फिर पुनः   भेंट होगी...
 कुलदीप ठाकुर
धन्यवाद...

7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात भाई कुलदीप जी
    अच्छी रचनाएँ चुनी..
    क़ानून अँधा नहीं होता,
    दरअसल जिसे क़ानून की
    सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है,
    वह अँधा होता है.
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आभार रचना को सम्मान के लिए ....

    उत्तर देंहटाएं

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