पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शनिवार, 7 नवंबर 2015

लडकियाँ


सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

15 लोगों की


और
26 लोगों की


के बाद
51 लोगों की
साझा संग्रह
वर्ण पिरामिड
की

*अथ से इति - वर्ण स्तम्भ*

की तैयारी में यूँ खोई कि
दिन का होश ही नहीं रहा
शुक्रवार को वृहस्पतिवार ही समझी
और पिछले शनिवार का पोस्ट नहीं बना पाई

लीजिये इस बार हाजिर हैं


इसमे कतई दो राय नहीं हो सकती है कि इस समस्‍या की मूल में आर्थिक अवस्‍था, सुरक्षा से जुड़े पहलू , अधेड़ अवस्‍था या बृद्धावस्‍था की दहलीज पर घुसते ही मानसिक और शारीरिक टेंशन की समस्‍या , अनावश्‍यक भागदौड़ , लड़के  या योग्‍य वर ढूंढनें की शरीर और मन दोंनों तोड़ देनें वाली कवायदें , भागदौड़ , जब तक लड़का न मिल जाय तब तक का मानसिक टेंशन , बेकार का सिद्ध होंनें वाले उत्‍तर , जलालत से भरा लोंगों का , लड़के वालों का व्‍यवहार झेलकर हजारों बार , लाखों बार यही विचार उठते हैं कि लडकी न पैदा करते तो बहुत अच्‍छा  होता 


 समाज में लड़कियों की इतनी अवहेलना, इतना तिरस्कार चिंताजनक और अमानवीय है। जिस देश में स्त्री के त्याग और ममता की दुहाई दी जाती हो, उसी देश में कन्या के आगमन पर पूरे परिवार में मायूसी और शोक छा जाना बहुत बड़ी विडंबना है।आज भी शहरों के मुकाबले गांव में दकियानूसी विचारधारा वाले लोग बेटों को ही सबसे ज्यादा तव्वजो देते हैं, लेकिन करुणामयी मां का भी यह कर्तव्य है कि वह समाज के दबाव में आकर लड़की और लड़का में फर्क न करे।





बेटियाँ मिट्टी के दियों की तरह होतीं हैं
कहीं लेती हैं जन्म और कहीं जलती हैं
कुम्हार कैसे करीने से दिया गढ़ता है
आग में रखता है तब  उसमे रंग चढ़ता है
कोई ले जाता है मन्दिर में जलाने  के लिए
और कोई तो उसे सोने से भी  मढ़वाता  है



शायद ऐसे लोग बेटी की
अहमियत नही जानते हैं
बेटा लाख लायक हो
पर बेटियाँ
मन में बसती हैं
उनके रहने से
न जाने कितनी
कल्पनाएँ रचती हैं

``
फिर मिलेंगे
तब तक के लिए 
आखरी सलाम

विभा रानी श्रीवास्तव


11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह..
    शुभ प्रभात
    दीदी
    ज्यादा
    मत खोना
    दीदी हमें आपको
    नहीं है खोना
    उत्तम प्रसंगिक
    व संग्रहणीय प्रस्तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति
    एक बिर यहाँ पर भी आए
    हिंदी चर्चा ब्लॉग

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्‍दर प्रस्‍तुति । आपने हरदम कुछ नया किया और हम लोगों को कुछ नया ही सि‍खाया है । आदरणीय आपकी सृजनात्‍मकता का ही परिणाम है ' साझा नभ का कोना' , 'कलरव' और ' वर्ण पिरामिड' ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्‍दर प्रस्‍तुति आदरणीय

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर लिंक्स। अच्छी हलचल। संग्रह के लिए बधाई और शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेटियां विषयक गहन विचारणीय लिंक्स-सह सार्थक हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुन्दर लिंक्स। अच्छी हलचल। संग्रह के लिए बधाई और शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. संग्रह के लिए बधाई और शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...