पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

132....जब 'मुर्दा' बोला? ..एक बीड़ी म्हारी भी लगा दो!

सादर आभिवादन
कल संजय भाई का नेट
काम नहीं कर रहा था
सो भाई कुलदीप जी ने
अपने कार्यालय हेतु

बनाई गई प्रस्तुति
यहां प्रकाशित कर दी
जन-जागरण के लिए ये
आवश्यक भी है....


चलिए चलें आज की पसंदीदा रचनाओं की कड़ियों की ओर...


जाने कहाँ ? 
गुम जाने की उसकी बुरी आदत थी, 
या फिर 
मेरे रखने का सलीका ही सही न था, 
चश्‍मा दूर का 
अक्‍सर पास की चीजें पढ़ते वक्‍़त 
नज़र से हटा देती थी 


अपनों के किये कराये 
पर लिखा गया 
ना नजर आता है 
ना पढ़ा जाता है 
ना समझ आता है 
भाई ‘उलूक’ 
लिखना लिखाना है 
ठीक है लिखा करो 


जब 'मुर्दा' बोला? 
वे अंधेरे में ही शव के नजदीक एक पुलिया पर बैठ गये। एक ने बीड़ी निकाली और जलाने लगा।
दूसरा बोला-एक बीड़ी मेरी भी लगा लेना!
तभी आवाज आयी- भाई! एक बीड़ी म्हारी भी लगाय दो!
तीनों ने एक दूसरे के मुंह को देखा, मानों एक दूसरे से पूछ रहे हों कि कौंन बोला? क्योकि तीसरा सिपाई बीड़ी नहीं पीता था।
तभी उन्होने देखा कि मुर्दे ने अपना हाथ ऊपर कर रखा है, और वह फिर बोला- भाई! एक बीड़ी म्हारी भी लगा दो! 


शहीद हूँ मैं .....
मेरे देशवाशियों
जब कभी आप खुलकर हंसोंगे ,
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
जो अब कभी नही हँसेंगे...


अभी तारे नहीं चमके 
जवां ये शाम होने दो 
लबों से जाम हटा लूँगा 
बहक कर नाम होने दो 














हाल ही में रश्मि रविजा जी का उपन्यास ‘काँच के शामियाने’ पढ़ कर समाप्त किया है! कुछ उनके प्रखर लेखन के ताप से और कुछ काँच के शामियानों के नीचे खड़ी मौसमों की बेरहम मार झेलती उपन्यास की नायिका जया की व्यथा कथा की आँच से मैं स्वयं को भी झुलसा हुआ ही पा रही हूँ ! 

आज्ञा दें यशोदा को
फिर मिलते हैं
















8 टिप्‍पणियां:

  1. शुभप्रभात...
    समस्त पाठकों को...
    आभार दीदी आप का...
    सुंदर व पठनीय हलचल के लिये...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर हलचल प्रस्तुति । आभार 'उलूक' का सूत्र 'अपनों के किये कराये पर लिखा गया ..' को स्थान देने के लिये यशोदा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर हलचल और अद्भुत लिंक संयोजन ...........

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आदरणीया यशोदा जी, सुन्दर-सुन्दर आलेखों के साथ मेरा साधारण सा संकलन प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. एक विवाह समारोह से लौटने के बाद आज इन लिंक्स को देख पाई हूँ ! मेरी प्रस्तुति को इन लिंक्स के साथ सम्मिलित करने के लिये मैं आपकी आभारी हूँ यशोदा जी ! हृदय से आपका धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...