पाँच लिंकों का आनन्द

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शनिवार, 12 सितंबर 2015

हरारत हताशा से क्या हारेगी अपने घर में ही *हिंदी*


सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
~~

शादी के बाद ...... मेरे पापा की लिखी चिट्ठी ...... मुझे लिखी , पढ़ने को मिली(शादी के पहले हमेशा साथ रहने की वजह) .... चिट्ठी की ख़ासियत ये होती थी कि ..... कभी वे भोजपुरी से शुरुआत करते तो ..... मध्य आते आते हिंदी में लेखन हो जाता था या ..... कभी हिंदी से शुरुआत करते तो मध्य आते आते भोजपुरी में लेखन हो जाता था ..... बेसब्री से इंतजार रहता था उनकी चिट्ठियों का .... तब मोबाइल नहीं था .... लैंड लाइन भी तो नहीं था .......
~~~~~~~~~~~ मेरे माइके में हम सभी घर में भोजपुरी में बात करते थे ...... सहरसा में जबतक हमारा परिवार रहा ; घर के बाहर मैथली का बोलबाला था , सबसे मैथली में बात करना पड़ा ...... बहुत ही मीठी बोली है *मैथली* ....... जब पापा सहरसा से सीवान आ गए तो घर बाहर केवल भोजपुरी का सम्राज्य हो गया .... आरा छपरा घर बा कवना बात के डर बा
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ शादी के बाद रक्सौल आये तो घर बाहर भोजपुरी का ही राज्य था लेकिन केवल मेरे पति को मुझसे हिंदी में बात करना पसंद था ..... फिर राहुल का जब जन्म हुआ तो राहुल से सब हिंदी में ही बात करने लगे ..... इनकी नौकरी में बिहार (तब झारखंड बना नहीं था) में कई जगहों पर रहने का मौका मिला .....


~~~~~~~~~~~~~~~ भोजपुरी+मगही+ मैथली+आदिवासी+हिंदी+उर्दू = खिचड़ी मजेदार लज्जतदार मेरी भाषा

शब्दों की खान
हिंदी उर्दू बहनें
भाषायें जान

ब्लॉग मित्र की लेखनी,

ब्लॉग मित्र की लेखनी

ब्लॉग मित्र की लेखनी

ब्लॉग मित्र की लेखनी

ब्लॉग मित्र की लेखनी

लगभग हिन्द के सभी राज्यों के कई शहरों को घुम कर देख चुकी हूँ......   हिन्द के हिस्सा होते हुए भी हिंदी ना बोलना ना समझना तमिलनाडु मंगलोर में देखी ...... कोशिश करें तो असम्भव नहीं ..... मेरी बहु मंगलोर की है बहुत अच्छा हिंदी बोलती है

कुछ लोग

आप कैसे हो
आप खा लो
आप पढ़ लो

आप के साथ ...... लो , हो , करो
ऐसी हिंदी मेरे समझ में नहीं आती

फिर मिलेंगे
तब तक के लिए
आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव


4 टिप्‍पणियां:

  1. लोक-भाषा में निहित अपनापन और निराली मिठास उसे मन के समीप बना देती है .मैं जब लोक भाषा पर उतरती हूँ तो कई का मिश्रण कर जाती हूँ विभिन्न अंचलों का मिला जुला प्रभाव अपने आप आ जाता है .पत्र जैसी प्रिय वस्तु अब दुर्लभ हो गई है - समय-समय की बात है .

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  2. शुभ प्रभात दीदी
    स्वच्छ और सुन्दर
    छल रहित भाषा है हिन्दी
    और उनकी सहेलियां
    भोजपुरी,मगही,मैथली,आदिवासी,हिंदी,उर्दू
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. निसंदेह हिंदी सम्पूर्ण भारत वर्ष में बोली व समझी जाती हैं आम लोग हो या फिर खास सबकी जुबान पर होती है हिंदी ..
    बहुत बढ़िया सार्थक हलचल प्रस्तुति हेतु आभार

    उत्तर देंहटाएं

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