पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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मंगलवार, 28 जुलाई 2015

प्रस्तुत है आज की दसवीँ प्रस्तुति..

सादर नमस्कार
कुछ खास नहीं
अपने मन की बात 

कह नहीं सकती
हाँ,,,  आपके मन की बात 

जरूर जानना चाहती हूँ

चलिए आज के पसंदीदा रचनाओं के लिंक्स की ओर.....


सर कलम करके वो आये हाथ अपने धो लिए
था लिखा रोना हमारे भाग में हम रो लिए

कह रहे थे सबसे वो करते हुए ज़िक्र-ए-रहम
तुम मनाओ खैर लेना चार था हम दो लिए


एक जंगल से गुजरते हुए ,
लिपटे चले आए हैं मकड़जाल
चुभ गए कुछ तिरछे नुकीले काँटे
धँसे हुए मांस-मज्जा तक .
दर्द देते रहते हैं .


कीजिए आतंकी हमला 
हम आपको सलाम ठोकेंगे 
सालों केस चलाएंगे 
फाँसी की सजा मुक़र्रर करेंगे 
और फिर आपके कुछ नपुंसक हमदर्द 
मानवाधिकार का हवाला दे 
फाँसी के विरोध में याचिका दे छुडवा ले जायेंगे 


चमकती दामिनी सी
बरसती बरखा सी कभी
बिखर जाती कभी धरा पे
शीतल चाँदनी सी
नित नये सपने संजोती
रस बरसाती जीवन में मेरे
मेरी सतरंगी कल्पनायें


कंचन काया मृतप्राय सी 
आया देन्य  भाव चहरे पर 
दीनता की अभिव्यक्ति 
मन में  चुभती  शूल सी |
दिल ने कहा सहायता कर 


जिन्हें गुस्सा आता है वो लोग सच्चे होते हैं ,

मैंने झूठों को अक्सर मुस्कुराते हुए देखा है …… !!!
आज का अंक यही पर सम्पन्न कर
आज्ञा चाहती हूँ
.....यशोदा

चलते-चलते ये गीत....

















6 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    यशोदा जी आपका प्रयास रंग लाने लगा है |
    उम्दा लिंक्स |मेरी रचना शामिल करने के लिये आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति दस हो गई
    दस हजार भी होंगी शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर चर्चा की है दीदी आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सभी लिंक्स देखीं हैं . अच्छी लगीं . मेरी रचना को चुनने के लिये धन्यवाद .

    उत्तर देंहटाएं

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