पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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मंगलवार, 21 जुलाई 2015

आनन्द ही आनन्द....सच में अच्छा महसूस हो रहा है....

आनन्द ही आनन्द....
सच में अच्छा महसूस हो रहा है....

हो गई हो कोई भूल, तो दिल से माफ़ कर देना….
सुना है कि, सोने के बाद, हर किसी की सुबह नहीं होती..!!

इस रविवार से हर रविवार को
माननीय कुलदीप सिंह जी
 आपको अपनी पसंद के 
पांच लिंक्स से परिचय करवाएँगे

आइए...ये है मेरी पसंद के लिंक्स...


कुछ नहीं पाना है
गीत यही गाना है
खुदा यहीं है ! 


जब खुद को भी ढूंढ न पाऊँ 
पलकों की ओट में छुप जाऊँ 
किसी बहेलिये के डर से 
डरी सहमी हिरणी सी सकुचाऊँ 


कितना भी पुकारोगे , नजर न आयेंगे 
अभी तो वक़्त है , मिल लो हमसे दो-चार बार और 
फिर ये चौबारे मेरे , मुँह चिढ़ायेंगे 


रास्ता इक और आयेगा निकल
हौसले से दो क़दम आगे तो चल

लोग कहते हैं भले ,कहते रहें
तू इरादों मे न कर रद्द-ओ-बदल


फ़ीते फट जाए तो जूते फेंका नहीं करते
आग लग जाए तो भुट्टे सेंका नहीं करते

जीवन है निर्धारित, जीवन है नियमित
कभी हम ऐसा तो कभी वैसा नहीं करते


अपने हाथों को 
मैंनें स्वयं ही बांध रखा है 
कि पांच से अधिक लिंक नहीं देना है
वजह से आप भलीभांति परिचित हैं


तमन्ना है की कोई हमारी सख्शियत से भी प्यार करे।
वरना हैसियत से प्यार तो तवायफ़ें भी करती हैं।

आज्ञा दें...
यशोदा













3 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया । पाँच बहुत हैं । आप का काम आपने बता दिया । बाकी पाठक की मर्जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह, नये अंदाज में हलचल...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. कुलदीप जी सभी लिंक्स बहुत बढ़िया लगे ...

    उत्तर देंहटाएं

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